मधुपुर में भू-माफियाओं से बचने की जरूरत, बसौड़ी जमीनों पर है गिद्ध वाली नजर !

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मधुपुर में भू-माफियाओं से बचने की जरूरत, बसौड़ी जमीनों पर है गिद्ध वाली नजर !

The Wajood@Desk

मधुपुर (झारखंड) : कभी मधुपुर… कोठियों और महलों का शहर हुआ करता था. एक से बढ़कर एक कोठियां यहां की खुबसूरती हुआ करती थी. फिल्मों की शूटिंग हो या फिर फिल्म से जुड़े लोेगों का ठहराव. या फिर बड़े-बड़े हस्तियों का आगमन. हर कोई यहां के शुद्ध वातावरण में रहने के लिए इच्छुक रहते थे. यही वजह थी कि यहां पर आलिशान कोठियां बनवाई जाती थी.

 

 

कई कोठियां आज भी इन माफियाओं के चंगूल में है…

मधुपुर में कई ऐसे इलाके हैं, जहां एक से बढ़कर एक कोठियां आज भी अपने अस्तित्व को बयां करती दिख जायेंगी. करीब दो दशक पूर्व से ही मधुपुर में कोठियों के अस्तित्व पर खतरा मंडराता चला आ रहा है. कई कोठियां भू-माफियाओं के चंगूल में आकर समतल जमीन में तब्दील हो गई और पार्ट-पार्ट कर बिकते चली गई, तो कई कोठियां आज भी इन माफियाओं के चंगूल में है. जिन्हें पार्ट-पार्ट कर बेचने की तैयारी है. मोटी रकम कमाने के चाह में ऐसे भू-माफिया बसौड़ी जमीन की तलाश में रहते हैं. किसी तरह जमीन को हासिल करना चाहते हैं.

ज्यादातर पावर ऑफ अटर्नी हो सकते हैं फर्जी…

सूत्रों की मानें तो ज्यादातर भू-माफिया जनरल पावर ऑफ अटर्नी लेकर जमीन की खरीद-बिक्री का खेल खेलते हैं. इस खेल में संबंधित विभाग के अधिकारियों को भी मोटी रकम का लालच देकर कागजी प्रक्रिया को दुरूस्त करवाया जाता है. ताकि जमीनों के निबंधन में प्राथमिक दृष्टि से कोई अड़चनों का सामना न करना पड़े. लेकिन जरूरी है, ऐसे भू-माफियाओं से दूर रहने की जो कोठियों को तोड़कर जमीनों की बिक्री करने वाले पावर ऑफ अटर्नी होल्डर होते हैं. इनके पावर ऑफ अटर्नी जांच का विषय होता है, ज्यादातर पावर ऑफ अटर्नी फर्जी भी हो सकते हैं.

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